July 14, 2024

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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और निरंजनी अखाड़ा के सचिव महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत !

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और निरंजनी अखाड़ा के सचिव महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत !

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और निरंजनी अखाड़ा के सचिव महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत के मामले में उनके शिष्य आनंद गिरि, लेटे हुए हनुमान मंदिर के पुजारी आद्या तिवारी और उनके बेटे संदीप तिवारी को गिरफ्तार कर लिया है। तीनों पर महंत नरेंद्र गिरि को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगा है। आनंद गिरि को हरिद्वार से पुलिस और SOG ने करीब डेढ़ घंटे की पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया। रात में ही उन्हें पुलिस सड़क मार्ग से यूपी के लिए रवाना हो गई। आनंद गिरी के खिलाफ आईपीसी की धारा 306 खुदकुशी के लिए उकसाने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। यह एफआईआर नरेंद्र गिरी के शिष्य अमर गिरी पवन महाराज ने दर्ज करवाई है।

महंत नरेंद्र गिरि की प्रयागराज में सोमवार को संदिग्ध हालात में मौत हुई थी। यूपी पुलिस को उनके कमरे से एक सुसाइड नोट मिला था, जिसमें उन्होंने अपने शिष्य आनंद गिरि और लेटे हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी आद्या तिवारी व उनके बेटे संदीप तिवारी को मौत की वजह बताया था।

7 लोगों के नाम आए सामने

नरेंद्र गिरि की मौत के मामले में शुरुआती तौर पर शिष्य आनंद गिरि, लेटे हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी आद्या तिवारी और उनके बेटे संदीप तिवारी का नाम सामने आ रहा है। इन 3 चेहरों के अलावा 4 अन्य लोगों का नाम भी इस हत्याकांड से जुड़ रहा है।

आनंद गिरि के मुताबिक मठ की संपत्ति को बेचकर कई लोगों ने बड़ी-बड़ी हवेलियां बनवाई हैं। इनमें नरेंद्र गिरि के सुरक्षाकर्मी अजय सिंह, मनीष शुक्ला, अभिषेक मिश्रा, शिवेक मिश्रा का नाम शामिल है। इन लोगों की नजर मठ की संपत्ति पर थी। गुरुजी ने मनीष शुक्ला की शादी करवाई थी। उसे करोड़ों का घर भी दिया था। अभिषेक मिश्रा को भी गुरुजी ने करोड़ों का घर दिया था। इसके साथ ही शिवेक मिश्रा ने करोड़ों खर्च कर घर बनवाया था। गुरुजी ने इसे भी सहयोग किया था। आनंद गिरि ने आगे बताया कि गुरुजी ने डॉक्टर समेत कई उद्योगपति से कर्ज ले रखा था। मई के बाद मेरी गुरुजी से मुलाकात नहीं हुई। हमारी आखिरी मुलाकात लखनऊ में हुई थी।

पुलिस हिरासत में लिए गए आनंद गिरि के मुताबिक गुरुजी की हत्या कर मुझे फंसाने की साजिश की जा रही है। मठ की जमीन हड़पने और वर्चस्व को लेकर महंत जी की हत्या की गई। पैसे वसूलने वालों ने एक बड़ी साजिश को अंजाम दिया है। सुसाइड नोट की भी जांच होनी चाहिए। ये गुरुजी नहीं लिख सकते। मेरा नाम एक षड्यंत्र के तहत लिखा गया है। मैंने अपना पूरा जीवन गुरुजी के साथ बिताया है और कभी भी उनसे कोई पैसा नहीं लिया। मेरे और गुरु जी के बीच सब कुछ अच्छा था। मैंने खुद और गुरू जी की हत्या की आशंका जाहिर की थी। आनंद गिरि ने पुलिस के एक बड़े अधिकारी और एक भू- माफिया को इस साजिश के पीछे बताते हुए जांच कराने की बात कही है। मैं सरकार से अनुरोध करता हूं कि इस मामले की पूरी जांच करें।

सुसाइड नोट को वसीयतनामा की तरह लिखा है

IG रेंज केपी सिंह ने बताया कि मौके से सात पन्नो का सुसाइड नोट मिला है। इसमें महंत नरेंद्र गिरि ने वसीयतनामा की तरह लिखा है, इसमें शिष्य आनंद गिरि का भी जिक्र है। नरेंद्र गिरि ने अपने सुसाइड नोट में यह जिक्र भी किया है कि किस शिष्य क्या और कितना देना है। सुसाइड नोट में यह भी लिखा है कि वह अपने कुछ शिष्यों के व्यवहार से बहुत ही आहत और दुखी हैं और इसीलिए वह सुसाइड कर रहे हैं। पहली नजर में यह सुसाइड का ही मामला समझ में आ रहा है।